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Kusum Yadav (1998-05 Batch), Educationalist

Posted by JNV-AAN on April 5, 2020 at 8:15 AM


मेरा छोटा सा सफरनामा 

रेवाड़ी से कुछ ही दूरी पर गांव मसानी में जन्मी कुसुम बचपन से नटखट और शरारती थी, 3 बहन भाईयो में सबसे बड़ी होने के नाते घर में सबकी लाडली थी लेकिन होश संभालते ही दादा निहाल सिंह (ex army man), kusum की नजदीकी थी, कुसुम को बहुत ही लाड प्यार से रखते थे और कुसुम भी ज्याातर दादा जी के पास ही खेलती कूदती थी. वक्त गुजरता गया और 5 साल की होते ही कुसुम को गांव में ही सरकारी स्कूल में दाखिला दिला दिया, चंचल और नटखट होने के बाद भी पढ़ने में होशियार थी और इसी लिए ज्यादा तर स्कूल स्टाफ कुसुम को प्यार करता था, वक्त के साथ साथ क्लास भी बढ़ती गई और 5 वीं में पहुंचते पहंचते कुसुम समझ दार और क्लास में पढ़ाई में सबसे होश्यार हो गई थी, इसी के चलते नवोदय विद्यालय नेचाना में 6th दाखिला लेने के लिए फॉर्म भर दिया, और बग़ैर किसी ट्यूशन के ही कुसुम ने एग्जाम पास कर लिया. इस उपलब्धि पर कुसुम मन ही मन बहुत खुश थी लेकिन साथ ही साथ थोड़ा उदास भी थी कि दादा जी और परिवार से अलग हो रही थी।

स्कूल में पहला दिन अजीब ख़्याल मन में चल रहे थे, जैसा सोचा था उसके बिल्कुल उलट था रहने के लिए पुराने टेंट और पढ़ने के लिए पुराने टेंट जैसे घर , कुल मिलाकर स्कूल कम रैन बसेरा ज्यादा लग रहा था,।लेकिन कुसुम अकेली तो थी नहीं और भी लडके और लड़कियां थी और कुछ दिन उदास रहने के बाद धीरे धीरे सब ठीक लगने लग गया और प्रिंसीपल मैथ्यू सर ने सब कुछ मैनेज कर लिया।

समय के साथ साथ सब ठीक ठाक गुजरता गया और कुसुम पढ़ाई में होशियार थी और बाकी गतिविधियों में भी रुचि रखती थी, और खेल कूद में भी काफी रुचि लेती थी। अपने हम उम्र के छात्र-छात्राओं में दौड़ने और ऊंची कूद में श्रेष्ठ थी। लेकिन जैसे ही आठवीं कक्षा में पहुंची , एक दिन मैदान में गिरने से पैर में फ्रैक्चर हो गया जिसकी वजह से 9 महीने घर पर बिस्तर पर गुजारने पड़े। एक श्रेष्ठ एथलीट बनने का सपना जैसे टूट ही गया । लेकिन उसने हार नहीं मानी और 9वी क्लास में लीना सिंह मैडम की देख रेख में कुसुम और कुछ लड़कियों ने हैंडबॉल कि एक टीम बनाई और नया स्कूल बनने के बाद मेहनत शुरू कर दी थी, कहते हैं ना कि मेहनत और लगन से सब मुमकिन है और 10 वीं तक पहुंचते पहंचते कुसुम ने एक अच्छी खासी हैंडबॉल की टीम तैयार कर ली थी। और साथ साथ पढ़ाई में भी सब कुछ ठीक ठाक था। बोर्ड की क्लास थी इसलिए खेल पर कम पढ़ाई पर ज्यादा जोर था और एग्जाम हुए और कुसुम ने मेरिट मे अंक प्राप्त किए , लेकिन कुसुम थोड़ी उदास थी उसको और ज्यादा अंक मिलने की उम्मीद थी।

अगली क्लास में दाखिला होता है और एक अलग ही एहसास था सब बदला बदला ऐसा लग रहा था कुसुम अब बड़ी हो गई है चमकता चेहरा, एक अलग जोश बहुत कुछ करने का जज़्बा लेकर नई शुरुआत होती है और समय गुजरता रहता है, शरारतें बढ़ जाती है। खेल में भी रुचि और बढ़ जाती है और 12 वीं तक पहुंचते पहुंचते स्कूल की सबसे तेज़ तर्रार एथलीट बन जाती है। 12 वीं बोर्ड ऊपर से साइंस स्ट्रीम के बोझ के बावजूद भी प्रदर्शन में कमी नहीं और खेल प्रतियोगिता में स्कूल टीम की अगुवाई करते करते जयपुर रीजन की अगुवाई की ओर जयपुर रीजन को राष्ट्रीय हैंडबॉल चैंपियन 2005 बनवा कर ही दम लिया और कुछ दिन बाद 12 वीं के एग्जाम हुए और अच्छे खासे अंक हासिल करके कुसुम स्कूल को अलविदा कह गई और छोड़ गई तो सिर्फ अपनी यादे ओर जूनियर लड़कियों के लिए प्रेरणा।।

कुसुम ने अपनी अगली पारी की शुरुवात केएलपी कॉलेज रेवाड़ी से शुरू की। यहां तक आते आते कुसुम एक बिंदास निडर और जवान लड़की बन चुकी थी और कॉलेज मे भी कुसुम ने पढ़ाई खेल कूद ओर अतिरिक्त गतिविधियों में भी कॉलेज का खूब नाम किया और कॉलेज के दौरान कुसुम की ज़िन्दगी में थोड़ा विराम लगा जब स्नातक के फाइनल क्लास में पहुंचते पहुंचते कुसुम की शादी कर दी गई, लेकिन शादी भी कुसुम के हौसलों को कम नहीं कर पाई और वह ज़िंदगी में आगे बढ़ती गई और उसके ससुराल वालों ने भी उसका हमेशा मनोबल बढ़ाया। कॉलेज के बाद यूनिवर्सिटी और फिर नौकरी, कुसुम ने कहीं भी पीछे मुड कर नहीं देखा और साथ साथ तीन बच्चे भी हैं जो बहुत ही सुन्दर ओर नटखट और अपनी मां कुसुम जैसे ऑलराउंडर।

कुसुम कई सरकारी नौकरी छोड़ कर अब विधि विषय में पीएचडी कर रही है और MDU रोहतक में लॉ फैकल्टी में पढ़ाती है और आगे पढ़ने को तत्पर कुछ कर गुजरने के हौसले को संजोये, जरूरतमंदो की मदद कर अपनी ज़िन्दगी जी रही है। कुसुम के लिए पैसा या नाम मायने नहीं रखता , बल्कि कोई काम दिल ओर दिमाग को तसल्ली दे बेहतर समझती है। ईश्वर अललाह कुसुम को ज़िन्दगी में हमेशा कामयाब करे ओर आसमान की बुलंदियों तक पहुचाएं और हमेशा ख़ुश रखे।।


Categories: My Story, Its About Me, Voice of Navodayans

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5 Comments

Reply Amit Kumar
1:48 PM on May 13, 2020 
Kusum says...
Vikram ji .... thank u so much . You are my real strength... without i m nothing. Blessed to hv you in my Lifeð???ð???ð???



So sweet Ma'am...
Vikram sir, cheers
Reply Kusum
4:41 AM on May 13, 2020 
Vikram ji .... thank u so much . You are my real strength... without i m nothing. Blessed to hv you in my Lifeð???ð???ð???
Reply Kusum
4:40 AM on May 13, 2020 
vikram says...
SAFAR SAFALTA KI AUR INSTEAD OF CHOTA SA SAFARNAMA.

REGARDS...........
Reply JNV-AAN
11:52 AM on April 6, 2020 
thanks a lot vikram ji for comment, we are looking forward for further more interaction
Reply vikram
9:06 AM on April 5, 2020 
SAFAR SAFALTA KI AUR INSTEAD OF CHOTA SA SAFARNAMA.

REGARDS...........
216195412