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Sumit Yadav (1999-06), Youth Coordinator (Raj), Ex GST Inspector

Posted by JNV AAN on May 1, 2020 at 2:15 AM

नवोदय में मेरा पहला दिन/ मेरी पहली याद

 

09.09.99 यह तारीख है, वह तारीख जिस दिन हम/ हमारा बैच नवोदय में आया। स्पेशल डेट लग रही है ना, 08.09.99 होती तो भी हमारे लिए तो स्पेशल रहने वाली ही थी। कुछ दोस्त जो तब पहली बार मिले थे और आज भी साथ हैं, वो भी इस तारीख के जितने ही स्पेशल हैं। लेकिन उस दिन तो इतना खुश नहीं था, शायद बिल्कुल भी नहीं, सच कहूं तो रोने का ही मन कर था। मनमोहन भाई, मेरे से एक साल सीनियर बैच से थे, मेरे बेड से बगल वाला बेड। वो भी छोटे ही थे पर शायद एक साल के अनुभव ने बड़ा बना दिया था, शायद समझ पा रहे होंगे की क्या चल रहा है मेरे अंदर इसलिए कोशिश कर रहे थे ख्याल रखने की थैंक यू मनमोहन भाई आपने बहुत ख्याल रखा क्योंकि ज्यादातर ड्यूटी साथ ही रहती थीं, मेरी नवोदय लाइफ के पहले यादगार किरदार।

 

अब दूसरे किरदार पर आते हैं, गिरधारी लाल सर। खड़ूस ही समझते थे उनको हम लोग शायद 7 साल बाद भी, शायद वो थे भी। लेकिन उनकी पहली याद तो बिल्कुल भी खड़ूस नहीं है। अगले दिन सुबह सबको जल्दी उठकर PT के लिए जाना था, हम तो घर पर नवजादे रह चुके थे जाहिर है नहीं उठ पाया, लेकिन जब आंख खुली तो देखा गिरधारी सर उठाने के लिए गोद में लेकर घूम रहे हैं। लव यू सर। खड़ूस जरूर लिखा था पर एक बात जो हमेशा याद रह जाती है वह ये है कि उन्होंने कभी हाथ नहीं उठाया या शायद मुझे याद भी नहीं है, उठाया होगा तो भी शायद जब उनके पास यही विकल्प बैचा हो तब। सर का नवोदय स्कूल से और साथ है बच्चों से दिल से लगाव था। लव यू वंस अगैन टू गिरधारी सर। ये थीं नवोदय में मेरी पहली यादें। भगवान से यही प्रार्थना है कि मुझे नवोदय का अपना ऋण उतारने का मौका दें।

 

परिचय देना शेष रह गया, मैं सुमित यादव 1999-2006 बैच। उपलब्धियां - MBA Finance (NET Qualified) पूर्व सेंट्रल जीएसटी इंस्पेक्टर, वर्तमान में जिला युवा समन्वयक, नेहरू युवा केन्द्र संगठन अंडर मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स। उपलब्धियां इसलिए बता रहा हूं कि बाहर वालों के लिए शायद सच में ये उपलब्धियां हैं, लेकिन नवोदय के साथियों की तुलना में तो मैं बहुत ही औसत विद्यार्थी था क्योंकि सब ही तो वहां एक से बड़े धुरंधर थे। मेरी सबसे बड़ी और सबसे यादगार उपलब्धि है, और शायद हमेशा रहेगी नवोदय में मेरा चयन क्योंकि वहां कोई औसत बच्चा नहीं जाता, हम नवोदयन कुछ भी कर सकते हैं बस जरूरत होती है सही दिशा की सिर्फ। धन्यवाद साथियों।



Categories: My Story, Its About Me, Old Memories

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2 Comments

Reply Jai Parkash
3:16 AM on May 1, 2020 
�ति �त�तम, व� दिन �प�� शब�द�� �� द�वारा याद �र�� ����ा ल�ा
Reply Amit Kumar
3:03 AM on May 1, 2020 
Superb su.mit, well sketched, missing those dayz
216195412